नगर पालिका में प्लेसमेंट एजेंसी ठेके में करोड़ों का फर्जीवाड़ा, उच्च स्तरीय जांच की मांग

आबूरोड नगर पालिका में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से श्रमिक आपूर्ति के नाम पर संगठित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। पूर्व उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने दस्तावेजों के हवाले से बताया कि चार साल पहले करीब 25 लाख रुपये का यह ठेका अब डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गया है। प्रतिमाह 15-20 लाख रुपये संदिग्ध भुगतान हो रहा है—25 ड्राइवरों के नाम पर लगभग 5 लाख, जबकि नगरपालिका के पास इतने वाहन नहीं और कई लंबे समय से मेंटेनेंस में हैं। इसी तरह 13 फायरमैन के नाम पर ढाई लाख, 28 हेल्पर पर साढ़े तीन लाख और गार्ड-बागबान पर करीब 3 लाख रुपये दिए जा रहे हैं, जो वास्तविक जरूरत से मेल नहीं खाता।

जीएसटी के नाम पर अतिरिक्त वसूली का आरोप
अर्जुन सिंह का कहना है कि नगरपालिका की स्वीकृत दरें “समस्त कर सहित” होती हैं, फिर भी एजेंसी हर महीने जीएसटी के रूप में करीब 3 लाख रुपये अतिरिक्त वसूल रही है। यदि यह राशि सरकारी खाते में जमा नहीं हो रही, तो मामला कर चोरी और गबन का बनता है। उन्होंने आशंका जताई कि बिना अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के इतना भुगतान संभव नहीं।
जांच और कार्रवाई की मांग

सिंह ने स्वायत्त शासन विभाग से पूरे भुगतान-प्रक्रिया, ठेका शर्तों की स्वतंत्र जांच, जीएसटी जमा का आधिकारिक सत्यापन और दोषियों पर तुरंत कानूनी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि आबूरोड की जनता के एक-एक रुपये का हिसाब लिया जाना चाहिए और प्रभावशाली होने के बावजूद भ्रष्टाचारियों को दंडित किया जाना चाहिए। यह मामला पहले उजागर हुए सड़क निर्माण, डंपिंग यार्ड और स्काई लिफ्ट खरीद में अनियमितताओं के बाद नगर पालिका की विश्वसनीयता पर और गहरा सवाल खड़ा करता है।
